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क्यों इतना बलिदान करूं मैं । Best poem in hindi


क्यों इतना बलिदान करूं में।


हैरान हूं , 
परेशान रहूं में।
क्यूं इतना बलिदान करूं में,
शब्दों में मां कहते हो मुझे तुम और
तुम्हारा ही उजाड़ा बागान बनूं मैं,
हर किसी का भार उठाया है ,
मेरी भी कोमल ही काया है,
अब और कितना भगवान सहुं मैं।
हैरान हूं परेशान रहूं मैं।

तुम सभी को दी ठंडी छाया ,
तुम सबको मिला, जो जितना मांगा पाया है,
तुम्हे जो दिया तुमने , कागज के बदले जलाया है,
फिर किसका अभिमान बनूं मैं ।
हैरान हूं परेशान रहूं मैं।

अपनी सांस तुमने काटी,
कितनी खोदी ज़मीन, कितनी खुद में बांटी,
मेरे अपने को मेरे अपने ने खाया,
और कितना बलवान बनूं में,
हैरान हूं परेशान रहूं में,
क्यों इतना बलिदान करूं मैं।

सूरज धीमान💙

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120 Comments

  1. Superb..,Zehrr ,
    Touching the heart

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  2. 😊😊😊👍👍👍👍👍lovely

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  3. Words describes reality ,nicee

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  4. Write more... Show your talent ❤

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  5. खूबसूरत ❤😇सूरज

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  6. सुंदर😍💓 कविता

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  7. You've got good writing skills

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  8. Kyun it a balidaan krun me , boht ache tarah see Likha hai

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  9. Great Suraj god bless you bro

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  10. One day definitely you will get success

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  11. You give touch of Shanta Kumarji

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  12. Will improve and will get success

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  13. Waaaao....Deep words !!....Keep it up boy! Way to go...Keep shinning 🙌👼

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