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कोरोना वाला रोना | कोरोना पर कविता | Best Poem .



कब तक चलेगा ओ भइया, ई कोरोना वाला रोना?
सेनेटाइजर हुआ क़ीमती, मास्क हो गया सोना।।

कब तक चलेगा ओ भइया, ई कोरोना वाला रोना??

देश में कर्फ़्यू का आलम है, मना है साथ में होना।
कब तक चलेगा ओ भइया, ई कोरोना वाला रोना?

हाथ में डंडा लेके पुलिस जी, चालू कर दिए धोना।
कब तक चलेगा ओ भइया, ई कोरोना वाला रोना?

नींद उड़ चुकी रातों की, अब दिन को पड़ रहा सोना।
कब तक चलेगा ओ भइया, ई कोरोना वाला रोना?

ठीक नहीं, गर्मी के मौसम में बारिश का होना।
कब तक चलेगा ओ भइया, ई कोरोना वाला रोना?

हा-हा कार मचा सब जगहां, धैर्य पड़ रहा बौना।
कब तक चलेगा ओ भइया, ई कोरोना वाला रोना?

हुआ प्रभावित इस वाइरस से, विश्व का हर एक कोना।
कब तक चलेगा ओ भइया, ई कोरोना वाला रोना?

चाहे जब तक चले कोरोना, शिष्टाचार ना खोना।
ये जो भी है घुटने टेकेगा, सबर करो, कर लो ना।।



Special Thanks

कविता--- पारस चौहान
पाँवटा साहिब, सिरमौर, हिमाचल प्रदेश

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